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27 November 2015

जासूस

जासूस
कब किस रूप में
क्या बन कर
सामने आ जाए
नहीं पता होता
किसी को।
पता तो तब चलता है
जब पंछी
फँसता है जाल में
और कैद हो जाता है
किसी पिंजरे में।
लेकिन
कुछ जासूस
ऐसे भी होते हैं
जो बता देते हैं
अपना सच
अपने कारनामों से।
जासूस
कुछ सच में ही
जासूस होते हैं
और कुछ
फँस कर
हो जाते हैं कैद
अपने ही पिंजरे में।

~यशवन्त यश©

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