01 January 2016

हर बीता पल कुछ सिखाता है

हर बीता पल
कुछ सिखाता है
हर आने वाला पल
नये सपने सजाता है
बीतना, आना
और फिर बीतना
कभी हारना
और फिर जीतना
मन की गहरी नदी की
बेपरवाह लहरों के साथ
जो ठोकरें खाता है
पत्थरों से टकराता है
वही उस पर
अपने साहिल से मिल पता है
हर बीता पल
कुछ नया सिखाता है।

~यशवन्त यश©

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