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28 June 2018

वक़्त के कत्लखाने में -13

यूं ही
समय के
इस खालीपन में
खुद से
बातें करता हुआ
अतीत के झरोखों से
अपने
आज को देखता हुआ
कभी-कभी सोचता हूँ
क्या रखा है
धारा के साथ बहने में
या
धारा के विपरीत चलने में
एक आसान है
दूसरा कठिन
मगर चुनना तो है ही
किसी एक को
वक़्त के इस कत्लखाने में
खुद का अस्तित्व
कायम रखने के लिए।

-यश ©
28/06/2018

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