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26 March 2020

अफसोस! अब तक ज़िंदा हूँ..

आसमान में उड़ता
एक बेखौफ परिंदा हूँ
अफसोस! अब तक ज़िंदा हूँ।

कोशिशें
उन्होंने कीं तो बहुत
तीरों से भेदने की
गर्दन और
धड़ को अलग करने की
ये मेरी किस्मत
कि अभी तक बच निकला हूँ
अफसोस! अब तक ज़िंदा हूँ।

वो सोचते रहे
आसान है
कुरेदना मेरे मन को
क्योंकि उनकी नज़रों में
मैं हमेशा
कमजोर ही रहा हूँ
अफसोस! अब तक ज़िंदा हूँ।

-यशवन्त माथुर ©
26/03/2020 

3 comments:

  1. जब मौत का तांडव चारों ओर मंडरा रहा हो कोई जिन्दा रहने पर अफ़सोस करे, सोचने वाली बात है, सब खैरियत है न !

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  2. बहुत बढ़िया

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